Richa Srivastava
← Poetry

वक्त का एक कतरा

वक्त का एक कतरा दर्द को अपने मे समाये हुए समय की हथेली पे ठहेरा बस गिरने को है हाथों से

अगले पल की चौखट पे खड़ी मैं सोचती रह गई कि फिसलने दूँ हाथों से या संजो लूं पलको में वक्त का वो कतरा…